Coronavirus Motivational Poem In Hindi | Inspirational Kavita

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नमस्कार दोस्तों, आज मैं किसी विषय पे बात करने नहीं आया हूँ।

बस मेरे मन में जो कुछ दिनों से चल रहा है, वो आपसे बाटूंगा।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि पूरा विश्व Coronavirus की महामारी से जूझ रहा है।
और भारत में भी कुछ हफ्तों का lockdown किया गया है और हम सब अपने अपने घरो में बंद हैं।
कोई सरकार को और कोई अपनी किस्मत को कोस रहा है।
और कोई इस समय का भी, आनंद ले रहा है।
तो यूँ ही कुछ दिनों से मेरे मैं में कुछ ख़याल घूम रहे थे, कुछ सवाल घूम रहे थे।
उन्हें एक कविता के रूप में मैंने लिखा है।
मैं कोई कवि तो नहीं, पर थोड़ी कोशिश ज़रूर की है।
इसे ध्यान से सुनियेगा, क्यूंकि कविता बोहोत सरल लग सकती है, पर उसके पीछे की बात बड़ी ही गहरी है।

बस एक गुज़ारिश है आपसे, अगर ये पंक्तियाँ आपके दिल को छू जाएं, अगर ये आपसे कुछ कह जाएँ, तो इन्हे सिर्फ अपने तक न रखियेगा।
जितना हो सके, दुसरो के साथ ज़रूर बाटियेगा।

तो ये पंक्तियाँ कुछ इस तरह हैं।

काल चक्र यह समय का, चलता रहा है, चलता रहेगा,
उस अनंत शक्ति के आगे, इंसान छोटा रहा है, छोटा रहेगा,

तुझे अगर है इस धरती पर रहना,
तुझे भी हर कष्ट को पड़ेगा सहना,

जब जब तूने खुद को, समझा है कुदरत से बड़ा,
जब जब तूने खुद को, माना है मालिक बड़ा,
तब तब कुदरत ने तुझे, एहसास कराया है तेरी औकात का,

तेरा हक़ तो है, पर तू हक़दार नहीं,
तेरी ज़मीन तो है, पर तू ज़मींदार नहीं,

तूने क्या सोचा?
तू रहेगा हमेशा?
कोई और तेरी हक़ीक़त का मोहताज नहीं।

अब तक तू दौड़ रहा था, ये कह कर, की वक़्त नहीं,
अब तक तू दौड़ रहा था, ये कह कर, की वक़्त नहीं,

और अब देख,
आज तू ठहरा भी है, थमा भी है,

आज तू ठहरा भी है, थमा भी है,
बचाने को अपनी ज़िन्दगी और अपना अस्तित्व।

और अब देख,
कुदरत का करिश्मा,
कहाँ ला खड़ा किया है ऐसे मोड़ पर,

न कोई धर्म है, न कोई जाती है,
न कोई अमीर है, न कोई गरीब है,

बस उस परमात्मा की दया के, सब मोहताज हैं।

देख, आज आसमान भी साफ़ है,
परिंदे भी उड़ने को तैयार हैं,
हर जीव इस धरती पर, खुश है आज़ाद है,

बस एक तू ही है,

बस एक तू ही है,
जो बेबसी में, है कैद खुद के ही घर के अंदर।

कमतर ये नहीं, तू है,
इनके हिस्से का हक़ मारने वाला भी, तू है,

इनसे नहीं, उस खुदा से तो डर,
क्या खुद को ही खुदा मान बैठा, तू है,

समझ जा, अब भी संभल जा,
के इतनी देर न हो जाये,

समझ जा, अब भी संभल जा,
के इतनी देर न हो जाये,

कहीं ऐसा न हो,

कहीं ऐसा न हो,
के तू इतिहास बन जाये,
और उसे पढ़ने को भी, कोई बाकी न रह पाए,

उसे पढ़ने को भी, कोई बाकी न रह पाए।

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